Wednesday, 14 March 2018

JANNAT KE KHWAAB AUR SHARAAB

i-Peg Poem of the Week #6

These poems are for my close friend Maj Vishwas Mandloi's delightful group of tipplers called i-peg. One has to raise a toast to the committed lot for their single-minded aim of spreading cheers!

All this while, the poems were appearing on www.sunbyanyname.com. Now onwards, these would appear here.

Here is the first one on this blog:

क्या पता मेरे है के नहीं नसीब,
क्यों देखूं मैं जन्नत के ख्वाब?

यह जो है जो हरदम है करीब,
बोतल में भरी प्यारी सी शराब।



बाकी सब गैर, यह ही है हबीब,
बुढ़ापे में भी दिखा देती है शबाब।

इसके लिए न अमीर न ग़रीब,
सबके लिए है बराबर आफताब।

मय कभी किसी की न हुई रकीब,
किसी का नहीं है खाना - ए - खराब।

कहता है रवि उसके अच्छे हैं नसीब,
जिसे मिली है यह जन्नत - ए - शराब।

Friday, 2 March 2018

RADHE KRISHNA HOLI

"मैया" कन्हैया बोले यशोदा से,
"राधा है गोरी, मैं हूँ काला"
यशोदा बोली, "ले रंग दे उसे भी
अपने ही रंग में गोपाला"।

इस तरह शुरू हुआ राधे कृष्ण से,
होली का पावन उपहार;
होली होलिका प्रह्लाद से तो है,
पर पहले है राधे कृष्ण का प्यार।


स्नेह का संदेश हम सबको,
मिला है अपने कन्हैया से;
होली में रंग लगाना सीखा है,
कृष्ण ने भी यशोदा मैय्या से।

आज होली में जब हाथों में है,
कई रंग का गुलाल,
कैसे भूल सकते हैं हम अपने
सबसे प्रिय नंद के लाल?

होली के दिन मत भूलो,
हर पुरुष है कृष्ण की छवि;
रंग से वह है ऐसे जुड़ा है,
जैसे रचना से है कवि।

इसे न समझे तो होली का
अर्थ रहेगा केवल आधा,
जैसे सोचो अधूरे हैं,
राधा बिन कृष्ण, कृष्ण बिन राधा।

Thursday, 1 March 2018

HOLI MEIN NA PIYA TO KAB PIYOGE?

i-Peg Poem of the Week #6
These poems are for my close friend Maj Vishwas Mandloi's delightful group of tipplers called i-peg. One has to raise a toast to the committed lot for their single-minded aim of spreading cheers!

आज तो पीना है आज तो होली है,
हम यारों की एक पूरी टोली है।
बीवी सोचती है रंग गुलाल में होता है,
उसे क्या पता वह बड़ी भोली है।

हमारी बोतल में ऐसा भरा है रंग,
आंख में चड़ने से सब दिखता है रंगीन;
और साथ में गर हो दोस्तों का संग,
तो सारी दुनिया नज़र आती है हसीन।



लोग कहते हैं पीने वालों को चाहिए बहाना,
पर आज तो यारो रंग का त्योहार है;
हमें तो रंग से रचने पे भी नहीं है नहाना,
हमें अपने रंगीन होने से प्यार है।

होली मुबारक सब पीने वालों को,
आज पैमानों को जाने दो छलक;
होली मुबारक ज़मीं पे जीने वालों को,
आज हमारी मंज़िल है फलक।




MAIN HOON KE NAHIN?

दिल की ख़ामोशी कुछ इस कदर बड़ गई है,
कि अब अपने आप से भी बात नहीं होती।
तन्हाई और मेरा कुछ अजब सा रिश्ता था,
अब तो उस से भी मुलाक़ात नहीं होती।

अंदर और बाहर भीड़ है, हरदम शोर है,
गुफ्तुगू का नहीं मिलता कोई मौका;
अपनी ही ज़िन्दगी पे क्यों किसीका ज़ोर है?
ज़ाती आज़ादी भी है क्या कोई धोका?

 देखता हूँ गौर से तो यूँ होता है महसूस,
मैं हूँ अपने ही तसव्वुर का ग़ुलाम;
यही ख़याल मुझको बनाता है मायूस,
अपनी सोच से मैं हूँ खुद ही बदनाम।


किसने बनाया मुझे और क्यों बनाया?
क्या मैं हूँ अलग और मुनफ़रीद?
फिर ये दिल पे किस का है साया,
कौन रहता है हमेशा मेरे दिल के करीब?

जाने कब मिले इन सवालों का जवाब?
क्या पता, रवि, मैं कुछ हूँ के नहीं?
ज़र्रा ज़र्रा खुदा ने बनाया है लाजवाब,
पर मैं अपने ही दिल में रहूँ के नहीं?

Wednesday, 28 February 2018

GUM SHUDA KI TALAASH

मुझे मेरी गुम शुदा ज़िन्दगी की तलाश है,
वो जो कोने में पड़ी है, क्या उसी की लाश है?

सोचा था वक़त आने पे सब कुछ कर पाएंगे,
फिर ही हम इस दुनिया से हंसते हुए जाएंगे;
वक़त गुज़रता गया और एहसास तक न हुआ,
ज़िन्दगी के वो हसीन लम्हे फिर कभी न आएंगे।

मुझे मेरी गुम शुदा ज़िन्दगी की तलाश है,
आखिर में चले जाने पे अब उसका एहसास है।



सहर जब थी जवां तो कभी न सोचा शाम का,
काम में यूँ मसरूफ के कभी न सोचा आराम का;
कई सरगर्मियों का इतना दिलकश था आगाज़,
के सोते जागते उन दिनों कभी न सोचा अंजाम का।

मुझे मेरी गुम शुदा ज़िन्दगी की तलाश है,
मेरे आगोश से निकल गयी, नहीं अब मेरे पास है।

काश अब जो मेरा इल्म है वो तब मुझे मिला होता,
काश मैं अपनी बेखबरी में ज़िन्दगी से हाथ न धोता;
काश ज़िन्दगी के प्यार को समझ लेता मैं तब,
आखिर में उस के चले जाने पे इस तरह न रोता।

मुझे मेरी गुम शुदा ज़िन्दगी की तलाश है,
उनके यहां ही रहती है, जिनको यह रास है।

ज़िन्दगी और वजूद दोनों अलग चीज़े हैं यारो,
कुछ इस तरह से ज़िन्दगी के संग वक़त गुज़ारो,
ज़िन्दगी बन के रहे आपकी अपनी महबूबा,
बुढापे में भी अपनी माशूका को न हारो।

नहीं तो...

मुझे मेरी गुम शुदा ज़िन्दगी की तलाश है,
वो जो कोने में पड़ी है, क्या उसी की लाश है?